तुम्हें चाहा था मैंने,
ये मेरी सबसे खूबसूरत गलती थी...
तुम्हें पाने की ज़िद कभी की ही नहीं,
बस हर दुआ में तुम्हारा नाम लिया।
तुम किसी और की मुस्कान बन गए,
और मैं तुम्हारी यादों का सहारा...
हर रात तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूँ,
जवाब कभी नहीं मिलता,
फिर भी अगले दिन उसी उम्मीद से जी लेता हूँ।
कहते हैं सच्चा प्यार मुकम्मल हो जाता है,
शायद मेरी मोहब्बत इतनी सच्ची थी,
कि उसे सिर्फ़ अधूरा रहना ही नसीब हुआ...
अगर कभी मेरी याद आए,
तो बस इतना सोच लेना—
कोई था...
जो तुम्हें अपनी जान से भी ज़्यादा चाहता था,
लेकिन कभी तुम्हारा हो न सका...!