हाथों में हाथ लिए,
अंगुलियों में अंगुलियां फंसाए
बस ताकते रहें एक दूसरे को,
मौन बोले सब कुछ,
बिना सुने हाथ टटोलते रहें
एक दूसरे के हर एक कोने कोने को,
इस तपिश से छुअन हो कि
देर तलक साथ होने का अहसास रहे,
सारी उम्र नहीं है संग होने को
पर साथ जितना भी रहें
अंगारों पे जज़्बात रहें,
आओ कुछ दूर तलक साथ चलें।।