प्रेमकविता : प्यार भरा दिन
आज फिर से कई दिनों के बाद,
तुमसे मुलाकात होने वाली है,
पता नहीं क्या हुआ,
पर दिल थम सा गया,
पुरानी यादों, ख़्वाबों में वो खोता चला गया।
तुझे देखने के लिए फिर एक बार
मैं बेकाबू हो गई,
धड़कनें, साँसें थोड़ी देर के लिए रुक सी गईं,
तुझे आते ही देखने की मेरी चाहत
पल-पल के साथ बढ़ती रही।
आखिर वो दरवाज़े की दस्तक सुनी,
मन ही मन तू ही होने की ख़्वाहिश की,
तेरे आते ही मेरा शोरभरा माहौल चुप हो गया,
और तुझे देखने से मेरा दिल खुद को रोक न पाया,
उसी पल मेरी आँखों में तुम्हारी तस्वीर मैंने खींच ली।
दिन कैसे खत्म हो गया, कुछ समझ ही नहीं आया,
चोरी-चुपके तुझे देखने में वो बीत गया,
तेरे आसपास होने से मानो जैसे सारा जहाँ मिल गया,
आज का ये दिन मेरा तुमसे ही बन गया,
तेरा सिर्फ होना ही मेरा सबकुछ हो गया।
माना कि ये प्यार सिर्फ मेरा है,
तू इससे कहीं दूर, अनजान है,
पर मुझे तुमसे कुछ माँगना नहीं,
सिर्फ ये प्यार तुझसे हमेशा करना है,
और एक ऐसा दिन भी होगा जब
मेरे कहने के बजाय तुझे वो महसूस होगा।
फिर से ये दिन आए,
तुझसे ऐसे ही मुलाकातें होती जाएँ,
मेरा तुमसे प्यार बढ़ता रहे,
और तू मेरा होकर रह पाए,
यह प्यार मेरा होने के बजाय हमारा हो जाए।