सीटी बजा रही है, गाड़ी बुला रही है
दौड़ो जल्दी-जल्दी, छूट न जाए
ये गाड़ी न करेगी किसी का इंतजार
प्लेटफार्म पर है लाखों की भीड़
सबको अपनी बारी का इंतजार
चलना ही जिंदगी है चलती ही जा रही है
गाड़ी बुला रही है सीटी बजा रही है
कितनी ही दुनिया देखो भागी ही जा रही है
जिंदगी की गाड़ी में सभी हैं यात्री
आ रहे हैं कुछ तो कुछ जा रहे हैं
सबकी आंखों में हैं सपने
अपनों से मिलने की आस बढ़ती ही जा रही है
जाने कहाँ से, कैसे, क्यों ये भीड़
दुनिया में बढ़ती जा रही है
जनरल डिब्बे की भीड़, देख भीड़ की परेशानी
एहसास हुआ पैसा कमाना है जरूरी
जानवरों की भीड़ में मानवता याद आ रही है
कितनी बेबस है ये भीड़, सहती ही जा रही है
देखो अमीरी-गरीबी की खाई बढ़ती ही जा रही है
ना जाने कितनी कहानियां कहाँ जा रही हैं
चलना ही जिंदगी है चलती ही जा रही है
सीटी बजा रही है, गाड़ी बुला रही है।
---dr वंदना शर्मा