सुखा है पर गिरा नहीं, अपनी जड़ से हिला नहीं..
क्योंकि जितना ऊपर दिखता, धरती भीतर दुगुना बसता..
पड़ेगी बारिश की जैसे ही, कुछ बुंदे प्रेम वाली..
लहरा जाएंगी टहनियां हरे पत्तों वाली..
"बस कुछ ऐसा ही चाहिए प्रेम को भी
थोड़ा सा समय, परवाह और दो शब्द प्रेम वाले"
- Soni shakya