दिल के हर एक ज़ख्म को छुपाए बैठे हैं,
हम अपनी ही महफ़िल में तन्हा बैठे हैं।
वो आए थे कभी खुशियाँ बाँटने,
अब यादों के दीये हम जलाए बैठे हैं।
खामोशी में भी शोर है उनकी यादों का,
हम हर एक लफ़्ज़ उनके दिल में सजाए बैठे हैं।
वक़्त की रफ़्तार ने छीन लिया सब कुछ हमसे,
बस एक पुरानी तस्वीर से दिल लगाए बैठे हैं।
अब तो उम्मीद भी हमने छोड़ दी है राजेश,
हम अपने ही इश्क़ को दफ़नाए बैठे हैं।