तुम कलयुग की पार्वती हो
"तुम कलयुग की पार्वती हो,
लेकिन यह कलयुग स्त्री को देवी मानना भूल चुका है।
यहाँ नवरात्रि में कन्याओं के चरण धोए जाते हैं,
मगर उसी समाज में बेटियों की चीखें भी अनसुनी कर दी जाती हैं।
मंदिरों में माँ दुर्गा की आरती उतारी जाती है,
पर घरों और सड़कों पर स्त्रियों की सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं देता।
लोग देवी की मूर्तियों के सामने सिर झुकाते हैं,
लेकिन किसी लड़की का सम्मान करने में उनका अहंकार आड़े आ जाता है।
तुम कलयुग की पार्वती हो,
और शायद यही तुम्हारा सबसे बड़ा संघर्ष है—
उस दुनिया में सम्मान के साथ जीना,
जो हर दिन स्त्री की परीक्षा लेती है,
फिर भी उसे देवी कहने का दिखावा करती है।" 🖤🥀🕉️✨