ज़िंदगी कोई सीधी राह नहीं,
ये धूप भी है, ये छाँव भी है।
कभी हँसी की बरसात मिले,
कभी आँखों में ठहराव भी है।
जो टूट गया, वो खत्म नहीं,
उसमें भी कोई प्रभाव भी है।
हर गिरना सिर्फ़ गिरना कब है,
उसमें उठने का भाव भी है।
कल की चिंताएँ धूल हुईं,
आज में जीने का चाव भी है।
कुछ रिश्ते मौसम जैसे हैं,
कुछ में बरसों का लगाव भी है।
समय की नदी बहती रहती,
इसमें बिछड़ाव, मिलाव भी है।
हर सपना पूरा हो ये कहाँ,
कुछ सपनों में अभाव भी है।
पर जीवन की यही खूबसूरती,
हर कमी में एक सुझाव भी है।
चलते रहना ही जीत यहाँ,
रुक जाना सबसे बड़ा घाव भी है।
जब तक दिल में उजियारा है,
तब तक हर अँधियारा दाँव भी है।
ज़िंदगी कोई सीधी राह नहीं,
ये धूप भी है, ये छाँव भी है।