अधूरी मोहब्बत का आख़िरी पन्ना
भाग–1: वह लड़की स्टेशन पर
बारिश की हल्की बूंदें रेलवे स्टेशन की छत पर गिर रही थीं।
रात के लगभग दस बजे थे। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ थी, लेकिन एक कोने में बैठा आरव बिल्कुल अकेला था।
उसकी आँखों में नींद नहीं, दर्द था।
हाथ में एक पुरानी डायरी थी, जिसके पहले पन्ने पर लिखा था—
"अगर कभी मैं खो जाऊँ, तो मुझे मेरी यादों में ढूँढ़ लेना।"
यह लिखावट सान्या की थी।
वही सान्या, जिससे आरव ने बेइंतहा मोहब्बत की थी।
तीन साल पहले इसी स्टेशन पर दोनों आख़िरी बार मिले थे।
सान्या ने उससे कहा था—
"अगर किस्मत ने चाहा, तो हम फिर मिलेंगे।"
और फिर वह ट्रेन में बैठकर चली गई थी।
उसके बाद न कोई कॉल आया, न कोई संदेश।
बस ख़ामोशी...
आरव ने लाख कोशिश की, लेकिन सान्या का कोई पता नहीं चला।
अचानक उसके सामने एक छोटी बच्ची आकर खड़ी हो गई।
उसकी उम्र लगभग दस साल होगी।
बच्ची ने मुस्कुराकर पूछा—
"आप आरव हैं?"
आरव चौंक गया।
"हाँ... लेकिन तुम मुझे कैसे जानती हो?"
बच्ची ने अपने बैग से एक लिफाफा निकाला।
"यह आपको देने के लिए किसी ने कहा था।"
आरव के हाथ काँप उठे।
लिफाफे पर वही लिखावट थी...
सान्या की लिखावट।
उसने जल्दी से पत्र खोला।
उसमें लिखा था—
"प्रिय आरव,
जब तुम यह पत्र पढ़ रहे होगे, तब शायद मैं इस दुनिया में न रहूँ।
मैंने तुमसे दूर जाने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि मुझे एक ऐसी बीमारी थी, जिसका इलाज संभव नहीं था।
मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से तुम्हारी ज़िंदगी रुक जाए।
लेकिन सच यह है कि मैंने आख़िरी साँस तक सिर्फ़ तुमसे ही प्यार किया।
अगर हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।
— तुम्हारी सान्या"
पत्र पढ़ते ही आरव की आँखों से आँसू गिरने लगे।
दुनिया जैसे थम गई थी।
लेकिन पत्र अभी पूरा नहीं हुआ था।
आख़िरी पंक्ति पढ़ते ही उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई—
"और हाँ... जो बच्ची तुम्हें यह पत्र दे रही है, वह मेरी बेटी है..."
(जारी...) ✨
यह उपन्यास का पहला भाग है। इसमें रहस्य, भावनाएँ, प्यार और बड़ा ट्विस्ट है। अगले भाग में पता चलेगा कि वह बच्ची कौन है और सान्या ने इतना बड़ा राज़ क्यों छिपाया। 📖❤️