राजपूताना की गौरव गाथा ⚔️🦅
रेत की धरती, शौर्य की खान,
राजपूताना था भारत की शान।
जहाँ तलवारों ने इतिहास लिखा,
और वीरों ने अपना सर्वस्व दिया।
महाराणा का वो अद्भुत स्वाभिमान,
न झुका कभी उनका अभिमान।
घास की रोटी खा ली लेकिन,
पर नहीं स्वीकारा पराधीनता का दान।
हल्दीघाटी की गाथा गाती,
आज भी अरावली की हर चोटी।
चेतक की वफादारी अमर हुई,
जब रणभूमि में गूँजी वीरता की बोली।
पद्मिनी का जौहर याद दिलाता,
सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं होता।
राजपूताना की वीर नारियाँ,
त्याग का दीप सदा जलातीं।
यहाँ बच्चों को लोरी में भी,
शौर्य और बलिदान सिखाया जाता था।
माँ के आँचल से निकलते ही,
देश पर मर-मिटना सिखाया जाता था।
राजपूताना केवल एक भूमि नहीं,
यह वीरता का अमर इतिहास है।
जहाँ हर कण में बलिदान बसा,
और हर धड़कन में स्वाभिमान का वास है।
⚔️ "राजपूताना की तलवारें भले म्यान में सो गई हों,
पर उनका शौर्य आज भी इतिहास के पन्नों में जीवित है।" ⚔️