माँ का इंतज़ार 🇮🇳❤️
सर्दियों की एक सुबह थी। गाँव के एक छोटे से घर के बाहर एक बूढ़ी माँ चौखट पर बैठी थी। उसकी आँखें बार-बार गली की ओर उठ जाती थीं। उसका बेटा अर्जुन, जो सेना में जवान था, छह महीने से घर नहीं आया था।
हर दिन की तरह उस दिन भी माँ ने बेटे की पसंद का खाना बनाया। पड़ोस वाली चाची ने मुस्कुराकर पूछा,
"बहन, अर्जुन तो आज भी नहीं आएगा, फिर इतना सब क्यों बना रही हो?"
माँ ने थाली सजाते हुए कहा,
"मुझे नहीं पता वो कब आएगा, लेकिन अगर आज आ गया और उसकी पसंद का खाना न मिला तो उसे दुख होगा।"
दिन बीतते गए। एक शाम अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई। माँ दौड़कर बाहर आई। सामने सेना की वर्दी में उसका अर्जुन खड़ा था।
माँ की आँखों से आँसू बह निकले। उसने बेटे को गले लगा लिया। कुछ देर बाद माँ ने देखा कि अर्जुन पहले जैसा खुश नहीं लग रहा था।
माँ ने पूछा,
"क्या बात है बेटा? तू इतना चुप क्यों है?"
अर्जुन बोला,
"माँ, सीमा पर मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण दे दिए। मैं उसे बचा नहीं सका।"
माँ ने बेटे का हाथ थाम लिया और बोली,
"बेटा, सैनिक का जीवन सिर्फ उसका अपना नहीं होता, वह पूरे देश का होता है। तुम्हारे दोस्त ने अपना फर्ज निभाया है और तुमने भी। दुख होना स्वाभाविक है, लेकिन उसके बलिदान पर गर्व भी होना चाहिए।"
अगली सुबह अर्जुन वापस ड्यूटी पर जाने लगा। माँ ने उसके माथे पर तिलक लगाया और काँपती आवाज़ में बोली,
"बेटा, एक माँ होने के नाते मेरा दिल चाहता है कि तू हमेशा मेरे पास रहे। लेकिन एक सैनिक की माँ होने के नाते मैं तुझे देश के हवाले करती हूँ।"
अर्जुन की आँखें भर आईं। उसने माँ के पैर छुए और कहा,
"माँ, अगर कभी देश और मेरी जान में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो मैं देश को चुनूँगा।"
माँ मुस्कुराई और बोली,
"यही तो संस्कार दिए हैं मैंने। मुझे अपने बेटे पर गर्व है।"
अर्जुन चला गया। माँ की आँखों में आँसू थे, लेकिन चेहरे पर गर्व की चमक थी। क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा सिर्फ उसका नहीं, पूरे भारत माँ का सपूत है।
🇮🇳 संदेश:
"एक सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करता है, लेकिन उसके पीछे खड़ी माँ अपने दिल की हर खुशी कुर्बान करके उस सैनिक को जन्म देती है।" ❤️🙏🏻🇮🇳