15/10/2025
जीवन
नदी के धाराएँ बहती हैं
क्या वह कभी,
पीछे की ओर देखती हैं?
पत्ते सुख कर गिर जाते हैं
क्या वह कभी,
अपने पूर्व रूप को खोजती है?
अगर नहीं तो तुम क्यों इतना सोचते हो?
जो बीत गया, सो बात गया
अतीत को एक सपना समझ के भूला दो।
ग्रहें घूमते रहते हैं
क्या वे कभी,
रुकने का सोचते हैं?
दिन और रात बदलते रहते हैं
क्या वह कभी,
न बदलने का सोचता है?
चिड़िया गगन में उड़ जाते हैं
क्या वे कभी,
गिरने से डरता है?
तो तुम क्यों इतना डरते हो?
क्यों भविष्य की चिंता कर थम जाते हो?
आगे बढ़ो, खुद को बदलो
जीवन छोटा है,
उस जीवन से प्यार करो।
जुगनू बनने के बजाय सूरज बनो
भूत, भविष्य सब भूल जाओ,
अपने वर्तमान को खुल कर जियो
शायद यह जीवन
दोबारा कभी नसीब ही न हो
इसीलिए, खुद के जीवन से प्यार करना सीखो।