और अंतिम बार
मैंने देखी उसकी आँखें
मेरे लिए ज़हर उगलती हुई।
जैसे कभी उनमें
मेरे नाम की रोशनी ही न थी,
जैसे मेरी मौजूदगी
उसके भीतर कोई युद्ध छेड़ देती हो।
मैं खड़ी रही ख़ामोश,
अपनी ही धड़कनों के मलबे पर,
और वो आंखे
बिना कुछ कहे
मुझे मेरी सारी मोहब्बत का
शोक सौंपकर चली गई।