मनुज परिस्थिति से लड़ता है.....
मनुज परिस्थिति से लड़ता है।
खुद जीवन जीना पड़ता है।।
मानवता की ज्योति जलाएँ ।
नहीं धर्म की यह जड़ता है।।
मधुरिम-मधुर सँवारो जीवन।
बुरी सोच से मन सड़ता है।।
गलत कर्म से दूरी रखिए।
लज्जित हो भू में गड़ता है।।
चिंताओं से चिता सँवरती।
वय का पौधा तब झड़ता है।।
सद्पुरुषों की धरा रही यह।
गलत मार्ग पर क्यों अड़ता है??
मनोज कुमार शुक्ल 'मनोज'
26/5/26