भीग जातीं हैं आंखें
बेवजह बेमतलब क्यों
उन्हें क्यों हम चाहें
बेवजह बेमतलब क्यों!
जर्रा जर्रा दिवाना है मेरा
दिल तेरा ठिकाना है मेरा
चाहूँ तो रोक लूं सांसें
बेवजह बेमतलब क्यों!
मैंने ही तुमको क्यों चाहा
बेइंतहा बेमुरव्वत गुनाह
अश्कों में खिल जाएं बांछें
बेवजह बेमतलब क्यों!