मैं कौन हूँ?
सब मुझे जानते हैं,
पर क्या मैं खुद को जानता हूँ?
ज़िंदगी भर लोगों ने पूछा — कैसे हो?
आज पहली बार दिल ने पूछा — सच में कैसे हो?
हर दिन किसी न किसी के लिए जीता हूँ,
कभी खुद के लिए जीने का भी मन करता है।
अजीब मोड़ पर खड़ा हूँ —
जहाँ खुद के लिए जीना भी सपना लगता है।
सब के लिए कुछ हूँ मैं,
बस अपने लिए… कुछ भी नहीं।
अब एक ही ख़्वाहिश है —
खुद को ढूँढना।
मैं कौन हूँ?
मैं कौन हूँ?