कड़वा है पर सत प्रतिशत सत्य है।
आज की मौज में
मैं टालूँ काम कल पर,
कहती रहती हूँ खुद से—
आज नहीं… कल।
लम्हों को यूँ ही खोकर,
वक्त को हल्का समझती हूँ,
हर अधूरे काम के पीछे
बस एक बहाना रखती हूँ।
एक समय ऐसा आएगा,
जब तरसूँगी सुकून से जीने को,
तब वक्त भी मुस्कुराकर कहेगा—
आज नहीं… कल।