अब पहले जैसी बात कहां.......
बचपन वाला इतवार कहां
सावन की बरसात कहां
कागज वाली नाव कहां
अब पहले जैसी बात कहां......
मिठाइयों में मिठास कहां
दिवाली के पटाखों में तेज आवाज कहां
होली के रंगों की छाप कहां
अब पहले जैसी बात कहां.....
टीचर की वो फटकार कहां
दादा की वो डांट कहां
बस्ते का अब बोझ कहां
गर्मी की वो रात कहां
अब पहले जैसी बात कहां....
मॉडल खिलौनों में मिट्ठी वाली बात कहां
पतंग ना पकड़ने का पछतावा कहां
बिन आंसू रोने का बहाना कहां
होठों पर बचपन वाली मुस्कान कहां
अब पहले जैसी बात कहां.......
पापा की नजरों में वो डर कहां
मां के आंचल में सुकून कहां
बचपन वाली बात कहां
अब पहले जैसी बात कहां।।
✍️ अंतिमा 😊