तुम भूल गई सारे कसमें वादे, और वो यादें सारी
में यादों को एक एक करके तोल रहा हूं
मैं फस गया निजात - ए-इश्क मैं गहरा इतना
की तू अब भी मेरी है यही दुनिया को बोल रहा हूं
कैसे भूलता मैं, कहो कैसे भूलता मैं
महक तेरी इतनी की गुल-ए- गुलाब शर्मा जाए
नसीहत -ए - इश्क मिलता नहीं किसी को आसानी से
बस इतनी ही आरजू हे तेरी तस्वीर मेरे नैनो में समा जाए
कोशिश की ढूंढने की, की मिल जाए तेरी तरह कोई और इस जहां में मुझे
लेकिन मेरे नादान-ए-दिल को मंजूर नहीं था
जैसे ही कोशिश करता तेरा मीठा थप्पड़ याद आ जाता है
इसलिए में तुझे आसानी से भूल जाऊ, दिल मेरा इतना नादान नहीं था