युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
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आज समूचा विश्व आशंकित है, होना भी चाहिए,
कुछ सनकी लोगों की सनक से
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा जो बढ़ गया है।
पर समझ नहीं आता है कि क्या मिलेगा उस जीत से?
जिसमें सब कुछ तबाह हो जायेगा,
संसाधन बर्बाद हो जायेंगे,
मूलभूत सुविधाएं भी संघर्ष का कारण बनेंगी
घर, दुकान, मकान, संस्थान खंडहर हो जायेंगे।
लाशों पर मंडराते गिद्धों के बीच
जीवित रहने के लिए कुछ खाने की तलाश करते
अभाव ग्रस्त मानव, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े
और आदिम युग के दिनों की आधुनिक तस्वीर
क्या यही नहीं है चल रहे युद्ध की विभीषिका का
अत्यंत भयावह और अंतिम परिणाम।
जबकि बच्चा-बच्चा जानता है कि
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है
बुद्ध के रास्ते पर चलकर ही
सौहार्दपूर्ण समाधान ही अंतिम विकल्प है,
पर कुछ लोगों के लंबरदार बनने की सनक ने
दुनिया को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है,
या मान लें इन सबके दिमाग में गोबर भरा है।
क्या वे इतने नासमझ हैं, जो बिल्कुल नहीं जानते
कि दुष्परिणाम उनको और उनके देशों,
लोगों को भी भोगना पड़ेगा,
युद्ध का दंश उनको भी न भूलने वाला ग़म
और अभावों की सौगात ही देगा।
तब वे किससे और किसके लिए युद्ध करेंगे
क्या युद्ध से ही खुद दो-दो हाथ कर
ऐसे ही अपनी मनमानी करेंगे?
चलो मान भी लिया तो भला उसका बिगाड़ क्या लेंगे?
पर इतना ज़रुर होगा कि आने वाली पीढ़ियों के मन में
अपने लिए नफरत की आग जरुर भर देंगे।
क्योंकि जब आने वाली पीढ़ियों को अहसास होगा
कि उनके पुरखे ही उनके जीवन में
अभावों, दुश्वारियों, बीमारियों के
माली बनने के बाद ही दुनिया छोड़कर गए हैं,
तब क्या वे सब उनके गुण गायेंगे?
बिल्कुल नहीं! पानी पी-पीकर कोसेंगे, गरियाएंगे।
मगर अब कुछ भी कहना बेकार है
दुनिया तबाही के पायदान पर आकर खड़ी है,
धरा खुद प्राणी विहीन होने के डर से काँप रही है,
हमें भी अब तैयार हो जाना चाहिए,
जीने की उम्मीद छोड़ घुट-घुटकर
मरने के लिए कफ़न बांध लेना चाहिए।
वैसे एक अंतिम विकल्प अभी शेष है
युद्ध के सौदागरों को सत्ता से दूर भगाइए,
और युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
हम आप सब या हमारा भारत ही नहीं
समूचे विश्व के साथ एकजुट होकर चलाइए,
और जैसे भी हो युद्ध का नामोनिशान मिटाइए
तभी फिर से मुस्कराने का विचार मन में लाइए।
सुधीर श्रीवास्तव