इंतज़ार।
मोहब्बत सच्ची हो तो इंतज़ार भी अच्छा लगता है,
अगर दिल ही बदल जाए तो हर बात बोझ लगता है।
जिसकी हँसी से घर में उजियारा उतरता था,
आज वही चेहरा भी अजनबी सा लगता है।
नज़र जब प्यार से देखे तो पत्थर भी फूल बन जाए,
मगर बदले हुए मन से गुलाब भी काँटा लगता है।
कभी जो हर रोज़ साथ चलने की दुआ करते थे,
वही अब दूर जाएँ तो सफ़र वीरान लगता है।
वफ़ा की राह पर चलना आसान कभी नहीं होता,
हर कदम पे दुनिया का बड़ा इम्तिहाँ लगता है।
दिल की दुनिया “प्रसंग” भी अजीब दस्तूर रखती है,
जो अपना था वही सबसे ज़्यादा दूर लगता है।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर