ज़िंदगी का सच
बचपन हँसते-खेलते बीत गया,
और हम जवानी की दहलीज़ पर आ खड़े हुए।
पर अजीब बात है कि
जैसे ही जवानी आई,
बचपन याद आने लगा।
बचपन को याद करते-करते
जवानी भी धीरे-धीरे बीत जाएगी,
फिर बुढ़ापा आएगा
और बुढ़ापे में फिर वही जवानी याद आएगी।
और एक दिन ऐसा भी आएगा
जब बुढ़ापा भी बीत जाएगा,
और हम इस दुनिया को
चुपचाप अलविदा कह देंगे।
इसलिए समझदारी इसी में है
कि जो पल अभी हमारे पास है
उसे मुस्कुराकर जिएं।
खुद भी खुश रहें
और दूसरों को भी खुशियां दें।
क्योंकि क्या पता
जो आज हमारा दोस्त है
वो कल दुश्मन बन जाए।
लेकिन ये क्यों सोचें?
ये भी तो हो सकता है
कि जो आज हमारा दुश्मन है
वो कल हमारा सबसे अच्छा दोस्त बन जाए।
क्या पता आज जिनसे हम
लड़ रहे हैं या नाराज़ हैं,
कल वही इस दुनिया में ना हों
और बस उनकी यादें रह जाएं।
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
इसे नफ़रत में क्यों गंवाना?
ना किसी से नफ़रत करो,
ना किसी से द्वेष रखो।
बस दिल में प्रेम रखो,
क्योंकि आखिर में
यादें भी वही रह जाती हैं
जहाँ प्रेम होता है।
हर हर महादेव। 🕉️
_ A singh