चौपाई - जन्मभूमि
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जन्मभूमि होती अति प्यारी।
हो अमीर गरीब दुखियारी।।
जन्मभूमि की अजब कहानी।
खट्टी-मीठी बोली बानी।।
जन्मभूमि को भूल न जाना।
इसकी मिट्टी माथ सजाना।।
सदा गर्व इस पर नित करना।
वैसे भी इक दिन है मरना ।।
जन्मभूमि का समय नहीं है।
आज यहाँ कर और कहीं हैं।।
जन्मभूमि हम छोड़ रहे हैं।
इससे नाता तोड़ रहे हैं।।
जन्मभूमि की पीड़ा सुनिए।
बंशी इसके सुरों की बनिए।।
नाहक में रिश्ता मत तोड़ो।
अरे बेशरम मुँह ना मोड़ो।।
सुधीर श्रीवास्तव