मौन का बयान
ख़ामोशी में भी एक सदा होती है,
जो लब न कह सकें, वही ख़याल होती है।
हर नज़र में छुपा रहता कोई सवाल,
झुकी आँख में भी इक मिसाल होती है।
कभी लफ़्ज़ों से ज़्यादा असर हो जाता,
टूटी हुई साँसों की भी कमाल होती है।
हम ये समझते रहे दर्द चीख़ माँगता,
मगर सब्र करने वालों की दुआ होती है।
इश्क़ जब हद से गुज़र जाए, समझ आता,
कह न पाना भी मोहब्बत की दवा होती है।
“प्रसंग” मौन में कह गया सब कुछ,
शायर की तन्हाई भी एक ग़ज़ल होती है।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर