गहरा रिश्ता.!!!
तू साथ जब से है, बन गया गहरा रिश्ता,
हर धड़कन में बस गया अनमोल रिश्ता।
तेरी हँसी से महकता है मेरा घर सारा,
तेरी बातों में झलकता है प्यारा रिश्ता।
तेरी आंखों में ढूंढ़ता हूँ खुद को हर रोज़,
तेरी निगाहों में बसता है साफ़ रिश्ता।
जब तू दूर जाती है, लगता है सब अधूरा,
तेरी यादों में सजता है मधुर रिश्ता।
तेरे हाथों की गर्मी से मिलता है मुझे चैन,
तेरी मुस्कान में खिलता है सच्चा रिश्ता।
हर पल तुझसे जुड़ा महसूस करता हूं मैं,
हर कदम पर साथ निभाता है अटूट रिश्ता।
जुदा न होंगे कभी हम, यही दुआ सदा,
प्रसंग कहे – तेरे संग बसा है मेरा गहरा रिश्ता।
"प्रसंग"
प्रणयराज रणवीर