थोड़ी देर के लिए ही सही, मेरे पास बैठ
ये लम्हा उधार ले ले, मेरे पास बैठ
शब्द थक गए हैं चलकर, ख़ामोशी बोल उठे
दिल को ज़रा सुला दे, मेरे पास बैठ
तू आए तो मौसम भी अपना रंग बदल ले
ये शाम सँवार दे, मेरे पास बैठ
ना वादों की ज़िद रख, ना कल की बात कर
आज को ही जीने दे, मेरे पास बैठ
आँखों में जो बचा है, वो सच कह जाए
झूठ से थोड़ी दूरी रख, मेरे पास बैठ
मैं दर्द कहूँ या हँसी—तू सुन ले बस इतना
मेरी हर बात समझ, मेरे पास बैठ