मैं और मेरे अह्सास
सुहाना मौसम
सुहाने मौसम की रवानी चित को बहका गई l
पहचानी सी आहट धड़कनों को धड़का गई ll
दिखने में तो बड़ा दिवाना लगता है नखराला l
जब चाहे बदल जाने की अदाएं भड़का गई ll
इश्क़ की फितरत तो देखो भरी महफिल में l
हुस्न मालिका के रूख से नकाब सरका गई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह