मैं और मेरे अह्सास
ख़ास
कोई मेरा पूछे तो कहना ख़ास नहीं हूँ l
किसी भी जवान दिल की आश नहीं हूँ ll
लोगों को दिखाने को नज़दीक आया था l
जितना दिखता हूँ उतना भी पास नहीं हूँ ll
जरा सी बात रूठ के जाने की बातों से l
गभरा के रुकने जाने वाली साँस नहीं हूँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह