वक्त कब आता है नहीं पता
कब जाता है नहीं पता
हमने महसूस करना
कब शुरू किया नहीं पता
कब यह खत्म हुआ नहीं पता
हर अहसास में दर्द है
बहुत सारी शिकायत है
प्रेम का लम्हा नहीं पता
हंसी का पल नहीं पता
शायद याद ही नहीं रहता
कब खुलकर जिएं
कब खुलकर हंसे
अच्छे से नहीं पता
क्या फर्क पड़ता है
हमने क्या किया
हमारा आज ही है
हमारा असली पता
अभी मैं जीवन का हर रंग है
कल क्या होगा किसे पता?