मैं और मेरे अह्सास
बसंत ऋतु
आज बसंत ऋतु साज़िश कर रही हैं l
हमे मिलाने की कोशिश कर रही हैं ll
देखो खिली खिली प्रफुल्लित सुबह में l
ओस की शबनमी बुँदे मालिश कर रही हैं ll
हर तरफ़ बहार छाई हुई है साथ साथ l
केसरिया रंगो की बारिश कर रही हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह