मोहे श्याम बिना चैन कहाँ,
नैनन बरसे नीर।
रात अँधेरी, मन है सूना,
तुम बिन जग अधीरा॥
बंसी की वो मधुर तान सुनूँ,
स्मृति में बस तुम ही तुम,
धड़कन बोले “राधे-श्याम”,
हर श्वास बने तुम संग सुगम॥
कुंज गली में ढूँढूँ तुमको,
पग पग पूछूँ नाम,
यमुना तट भी रोता देखो,
लेकर तेरा धाम॥
चाँद भी फीका, तारे रूठे,
जबसे गए हो दूर,
मन-मंदिर की ज्योत बुझी है,
कैसे सहूँ ये सून॥
आओ कान्हा, दीन दयाला,
दर्शन दो इक बार,
विरह अगन में जलती राधा,
कर दो जीवन सार॥
मोहे श्याम बिना चैन कहाँ,
आ जाओ गिरधारी,
तेरे चरणन की धूल ही मोहे,
लगती है प्यारी॥