पल्खा पल्खा
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पल्खा पल्खा
ओ मेरी पल्खा
कैसे कैसे
हूँ दूर मैं कैसे…
छोड़ूँ छोड़ूँ
कोई बातें
कोई मुलाक़ातें
पल्खा पल्खा
ओ मेरी पल्खा
तेरे तेरे
बिन तेरे
अधूरे अधूरे
हैं ख़्वाब अधूरे
न कोई
न कोई
भटके से किनारे
लहरें लहरें
अपनी उम्र भागे
समुद्र से पानी
पानी से पानी
नीला पल्खा
नीला पल्खा
छूते रास्ते
मुड़ी मंज़िलें
गुज़रे गुज़रे
ज़माने ज़माने
पल्खा पल्खा
कोई जादू
कोई खिलौना
टूटा सहारा
छूटा किनारा
अंधा दीवाना
खाली मकान
खुला मकान
टूटा मकान
घर था कभी ये
ये था कभी घर
पल्खा पल्खा
सो जा मेरी
नींद, सो जा
अब नहीं दुनिया
भटकी राहें
दूर निगाहें
कोई नहीं
वहाँ
वहाँ नहीं कोई
शैतान, मुसीबत
बुरी बला कोई
छूती नहीं तुझे
छूती नहीं मुझे
टूटी सड़क को
फिर कोई कैसे तोड़े
पल्खा पल्खा
सो मत जाना
कोई नहीं यहाँ
कोई नहीं यहाँ
तेरे सिवाय
तेरे सिवाय
मेरे सिवाय, मेरे सिवाय
कोई है क्या
नहीं है क्या
जुगनू बुझ गए
मकान टूटे
खाली सड़कें
भटके मुसाफ़िर
कोई सहारा
मेरा तेरा
तेरा मेरा
बुझते दिए को
आख़िरी दावत
किसने छोड़ी
मेरी उम्र
है क्या, क्या है
क्यों से आगे
अनंत के आगे
पीछे कोई
पीछे कोई
नहीं, नहीं
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