#10. इस साल भी सावन आया था हवा के साथ कुछ बुँदे साथ लाया था,
पंछियो की चहक, फूलों की महक, तितलियों से भरा पुरा अकाश था,
मेरे पास तेरा होने का एहसास था फिर भी मुझे बस तेरा तलाश था,
मुझे लगा तु कहीं से दौड़ कर आयेगा और मेरे सीने से लग जायेगा,
पर अब ऐसा कहाँ हो पाता हैं तु जो एक बार जाता हैं बरसों लौटकर न आता हैं,
तु तो कहता था हर सावन में आऊँगा पर्व-त्योहार, हर मांगलिक पावन (शुभ कार्य) में आऊँगा,
क्या तुम्हें माँ की याद नहीं आती या फिर तेरे शहर में पर्व-त्योहार या बरसात नही आती,
तेरे बिना...... चहकती गालियाँ विरान, अपना घर सुनसान, घर का आंगन लगता हैं मुझे अंजान,
आखिर कब तु चहकता हुआ आयेगा, कब मेरी ममता तुझपर फूलों की तरह छायेगा,
तेरे इंतेजार मे दिन-रात रस्ते देखें हैं, मैंने बरसो मौसम बदलते देखें हैं,
मैं जानती हूँ तु दुनियाँ की भीड़ मे खोया होगा हर रात माँ की याद में सोया होगा,
तुझपर जिम्मेदारियों का बोझ हैं, अब तु दौड़ता-भागता हर रोज हैं,
आख़िर क्यों इतना बड़ा हुआ माँ की गोद छोड़ अपने पैरों पर खड़ा हुआ,
कल तक था तु दुनियाँ में अंजान, आज तेरा खुद का हैं एक पहचान,
मेरी दुआएं हमेशा तेरे साथ रहे,तेरे चेहरे की मुस्कान हमेशा आबाद रहें,
कल तेरे याद में सोयी थी, तेरे ख्यालों में कहीं खोयी थी, एक पल ऐसा लगा,
जैसे तु घर को आया था बाहर जाकर देखी तो वहाँ बस पेड़ का छाया था...
इस साल भी सावन आया था हवा के साथ बस तेरी यादें साथ लाया था.....
:- रौशन कुमार केसरी
05.01.2026