#3. इस रात का कोई सवेरा तो होगा, उसकी यादों के समंदर में कोई बसेरा तो होगा,
मेरे बिस्तर ने समंदर जितनी बेचैनियाँ समेटें हैं खुद में, हजारों सवाल, हजारों ख्वाहिशें हर रोज डूबता हैं इसमें, बस एक सवाल जो हर पल कुढता हैं मेरे मन में,
कि यहाँ परिंदों का भी एक हीं आशियाना होता है तेरा कोई एक निश्चित बसेरा तो होगा, इस रात का कोई सुनहरा सवेरा तो होगा.......?
:- रौशन कुमार केसरी
10.11.2025