“एकतरफ़ा प्रेम” — राधा की मौन व्यथा
मैंने तुमसे प्रेम किया, श्याम,
पर कभी जताया नहीं,
क्योंकि तुम्हें पाना नहीं,
तुम्हें पूजना मेरा स्वभाव था।
तुम मुस्कराए, तो संसार हँस पड़ा,
तुम उदास हुए, तो मेरी आत्मा रोई,
तुम्हें खबर तक न हुई कभी,
कि मेरी हर साँस तुम्हारे नाम से जुड़ी थी।
मैंने तुम्हारी राह देखी,
पर तुम्हें रोकना नहीं चाहा,
क्योंकि प्रेम अधिकार नहीं,
स्वतंत्रता की पहली शर्त होता है।
तुम रुकते तो मेरी दुनिया बनती,
तुम चलते तो मेरी पूजा होती,
मैंने हर हाल में तुम्हें चाहा,
बिना शर्त, बिना शिकायत, बिना सौदे के।
तुम किसी और की धड़कन बने,
तो भी मैंने दुआ की,
क्योंकि मेरा प्रेम इतना छोटा नहीं था,
कि तुम्हारी खुशी से जल जाए।
मैंने अपना नाम तुम्हारे नाम से जोड़ा नहीं,
पर अपनी रूह तुम्हें सौंप दी,
दुनिया ने इसे हार कहा,
पर मैंने इसे भक्ति माना।
क्योंकि जो प्रेम पाया जाए, वह संबंध होता है,
जो प्रेम खोकर भी जिया जाए,
वही सच्चा प्रेम होता है।
तुम कभी मेरे नहीं हुए, श्याम,
फिर भी मैं हर जन्म तुम्हारी ही रहूँगी,
क्योंकि कुछ प्रेम मिलन के लिए नहीं होते,
वे तो बस निभाने के लिए होते हैं —
एकतरफ़ा, फिर भी सम्पूर्ण। 💔🌸