"बेकार की दुनियां"
झूठ‑फ़रेब के बाज़ार की दुनियां,
रिश्तें-नातों के व्यापार की दुनियां।
वफ़ा, उम्मीदें, हसरतें, ख़्वाब,
क्या जाने बेकार की दुनियां।
उड़ान से पहले जो तोड़ दे हौसले,
घमंड में डूबी अहंकार की दुनियां।
हमराह का हमराज़ बनना सीखा नहीं,
मतलब में अंधी हुई गद्दार की दुनियां।
सच की क़ीमत कोई पूछे भी क्या,
मुनाफ़े की भूखी मक्कार की दुनियां।
“कीर्ति” ने देखा है क़रीब से बहुत,
एहसास न समझे पत्थर की दुनियां।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️