शीर्षक: उस दिन जब पृथ्वी एक आग का गोला था।
अउर फिर साल बदलत-बदलत,
आदत अइसन बदल जाई,
खतम हो जाई इंसानन के भीड़ एहिजा से
अउर समस्त सृष्टि हो जाई फिर से शमशान।
जइसे जागल नयनन से लउके
पाथर हृदय, भीतर से खाली,
धूर-धक्कड़ से भरल रेतिला रेगिस्तान।
softrebel
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