टूटे ख्वाबों का बोझ उठाया है अब तक,
बस इक तन्हा दिल को समझाया है अब तक।
हर मोड़ पे बिखरी थी मायूसी बहुत,
फिर भी उम्मीद को नहीं गिराया है अब तक।
आँखें थक चुकी हैं रोते-रोते मगर,
कल की रौशनी का दिया जलाया है अब तक।
कभी लगता था सब कुछ ख़त्म हो गया,
पर उस सन्नाटे में भी गुनगुनाया है अब तक।
ज़ख़्म गहरे थे, पर सी लिए चुपचाप,
उम्मीद की चादर को ओढ़ाया है अब तक।