औरतें आखिर चाहती क्या हैं?
बस इतना ही तो
कि थक जाएँ तो
कोई पूछ ले
“आज मन ठीक है?”
रोई हों तो
कारण पूछने की ज़रूरत नहीं,
बस आँखों में
थोड़ी देर ठहर जाना काफ़ी है।
भरी महफ़िल में
नाम लेकर बुलाने की नहीं,
एक नज़र भर देख लेने की चाह होती है,
जो कह दे—
“तुम अकेली नहीं हो।”
सड़क पार करते
हाथ थामने का मतलब
हिम्मत देना होता है,
और चुपचाप चलने में
साथ निभाने का वादा।
इन्हें बड़े वादे नहीं चाहिए,
बस छोटे-छोटे यकीन चाहिए
कि कोई है
जो बिना कहे भी साथ खड़ा है।
औरतें चाहती हैं
बस मन पढ़ लिया जाए,
भाव समझ लिया जाए,
बिना शब्दों के,
बिना शोर के।
औरतें चाहती हैं.........
डॉ सोनिका शर्मा
- Dr Sonika Sharma