रात गहरी नींद आने को
सुबह करी नींद से जगाने को
दोपहर भूख और प्याज की तलाश को
शाम जगूंगती रोशनी और उजाले खास को
कब बीत गई पता ना चला कब आ गई पता ना चला
बच गई बस यह जिंदगी खास को
रात करी नींद आने को सुबह कारी नींद से जगाने को
सुबह की नटखट दोपहर की चाल रात की सुस्तियां फिर सुबह का कमाल अब क्या करें इसका हल
जहां से शुरू वही खत्म है कहानी
रात की गहरी नींद आने को सुबह कारी नींद से जगाने को
झज्जर वह बोलती कब जाओगे
हम भी कंप्लीट थोड़ी है जब जाओगे
फिर से वही आदत वही पुरानी चाल है
हम भी थोड़ी कम बदमाश है
रात की गहरी नींद आने को सुबह करें नींद से जगाने को