Hindi Quote in Poem by Ganesh Kachhwaha

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दो कविताएं -
(1)
हाथ कमजोर है, हौसला नहीं

हाथ कमजोर है, हौसला नहीं,
कदम धीमे हैं, रुकने का इरादा नहीं।
छड़ी थामी है आज सहारे के लिए,
सपनों ने अब भी मेरा हाथ छोड़ा नहीं॥

संकटों से घबराया नहीं, कभी टूटा नहीं हूँ,
ठोकरों ने ही मजबूती से चलना सिखाया है।
चौराहों से नई दिशाएँ मिलीं,
राहों ने राही बनना सिखाया है॥

संघर्ष जीवन का श्रृंगार है,
यह समय ने मुझको समझाया है।
जो समझे थे मुझे अंत की दहलीज़ पर,
उन्हें मेरी जिजीविषा ने चौंकाया है॥

पुरुषार्थ से पाया जो कुछ भी जीवन में,
हिम्मत को मैंने कभी हारा नहीं।
हाथ कमजोर हो सकते हैं मेरे,
पर हौसला—कभी थका नहीं, टूटा नहीं॥

मुसीबतों ने ही संभाला, संवारा, निखारा है,
जीवन ने मुझे कभी निराश किया ही नहीं।

गणेश कछवाहा
रायगढ़, छत्तीसगढ़

(2)

दूसरी पारी

छड़ी थामे जब चला मैं,
रास्तों ने डर दिखाया,
पर हर कदम ने सिखाया—
हार मानना मेरे स्वभाव में नहीं।

शनैः-शनैः कदम बढ़ते गए,
रास्ते खुद खुलते गए,
मैं आगे बढ़ता गया,
पीछे देखना मेरी आदत नहीं।

शरीर थक सकता है,
हौसले नहीं।
घाव आज भी बोलते हैं,
पर आत्मविश्वास को चुप करा नहीं पाए।

जो टूटकर भी खड़ा है,
वही जानता है जीवन का मोल।
यह दूसरी पारी है मेरी—
और अब हर पल है अनमोल।

गणेश कछवाहा
रायगढ़, छत्तीसगढ़

Hindi Poem by Ganesh Kachhwaha : 112009739
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