रात की खामोशी में जब शब्द तुम्हारे आते हैं,
मानो मेरे दिल के दरवाज़े पर दस्तक दे जाते हैं।
थकी हुई पलकों पर सपनों की परतें बिछ जाती हैं,
तुम्हारी हर हल्की मुस्कान, चुपके से साथ निभाती है।
दिन भर की उलझनों को तुम एक पल में सुलझा देती हो,
थोड़ा-सा हँस दो तो मेरी दुनिया नई रौशनी पाती है।
ये कैसी जादुई रीत तुम्हारी, कह नहीं पाता पर समझता हूँ
किसी अपने की आहट से ही तो आदमी घर-सा हो जाता है।
तुम दूर सही, मगर एहसास तुम्हारा कितना पास है,
हर रोज़ तुम्हारी यादों का दीप मेरे भीतर उजास है।
किस्मत ने चाहे मिलन अभी तक रोका हो,
पर दिल ने ये रिश्ता चुपचाप स्वीकार किया है।
इसलिए
कहते-सुनते बात तुम्हारी, सो जाता हूँ,
ऐसे ही मैं हर रात, फिर तुममें खो जाता हूँ।