🌙 जन्म और मृत्यु का रहस्य — एक ही आत्मा, दो अलग लम्हे
अजीब नहीं लगता?
इंसान जब इस दुनिया में आता है,
तो खुद रोता हुआ जन्म लेता है,
और आसपास की दुनिया हंसती है, खुश होती है।
और जब वही इंसान दुनिया छोड़कर जाता है,
तो खुद शांत, स्थिर, मौन होता है—
और उसके पीछे बाकी लोग रोते हैं, टूटते हैं।
क्या अद्भुत खेल है यह भी…
जन्म में रोना बिना दुख के,
और मृत्यु में शांति दुख के बीच।
जन्म में आत्मा पहली बार शरीर के बंधन में बंधती है,
इसलिए उसका रोना स्वाभाविक है।
और मृत्यु में आत्मा बंधनों से मुक्त होती है,
इसलिए उसका शांत हो जाना भी स्वाभाविक है।
कितनी बड़ी लीला है यह…
आगमन का रुदन,
विरह की शांति — यही शिव का चक्र है।
और मैं एक बात सोचती हूँ…
लोग “राम नाम सत्य है” अंतिम संस्कार में कहते हैं,
लेकिन मैं तो यह वाक्य जन्म के समय कहूँगी।
क्योंकि सत्य का ज्ञान अंत में क्यों?
सत्य की शुरुआत ही जन्म से होनी चाहिए।
जन्म की दीक्षा — “राम नाम सत्य है”
और मृत्यु का अंतिम मंत्र — “शिवोऽहम।”
जीवन का पूरा चक्र इसी में समाया है।
om shiv gorksh🙏❣️
by :pinklotus