Hindi Quote in Poem by Anup Gajare

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२०…"मैं उन ही का हूँ"
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हर किसी के हिस्से
मैं नहीं आता।
मेरा अपना ही एक हिस्सा है—
सायं उतरती हवा की
वो हल्की काँपती ठंड,
जो छूते ही मौसम की
आत्मा बन जाती है।

गर्मी में दुबककर बैठने वालों,
मैं शायद तुम्हारे हिस्से
कभी न आ सकूँ।
चाहो तो मेरी अस्त्र-सी सजी
कलम ले लो—
पर मैं,
कलम विहीन होकर भी
कंबल-विहीनों का ही
रहूँगा।

ठंड में सुबकते जीव
मुझे पुकारते हैं—
उन पर कंबल ओढ़ा दो,
और मैं
पूरा का पूरा
तुम्हारा हो जाऊँगा।

हर किसी की मुट्ठी में
मैं नहीं समाता।
मेरा अपना ही एक हिस्सा है—
सायं ढलती हवा की
वो हल्की काँपती ठंड,
जो छूते ही
मौसम की आत्मा बन जाती है।

गर्मी में सिकुड़कर बैठने वालो,
मैं शायद तुम्हारे हिस्से
कभी न आ पाऊँ।
चाहो तो
मेरी अस्त्र-सी चमकती कलम
ले लेना—
पर मैं,
कलम-विहीन होकर भी
कंबल-विहीनों का ही
रहूँगा।

सर्द रातों में सुबकते जीव
मुझे पुकारते हैं—
“हम पर एक कंबल डाल दो…”
और मैं
अपने समूचे अस्तित्व के साथ
उन्हीं का हो जाता हूँ।

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Hindi Poem by Anup Gajare : 112006517
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