मैं उन आशिकों की तरह तो नहीं
जो चांद तारे सूरज को तेरे माथे में सजाने के लिए कहे
मैं तो एक लेखक हूं
मैं अपनी कलम से कुछ शब्द लिखकर तेरी चेहरे पर मुस्कुराहट दे सकता हूं
कुछ अधूरे ख्वाब तेरी जुल्फों में सवार सकता हूं
तेरी पायल की खनक को मैं अपने दिल की धड़कन बन सकता हूं
तेरे माथे की बिंदी को मैं अपनी अमावस्या रात की चांदनी बन सकता हूं
तेरे जो कानों की झुमकी है ना उसे मैं अपनी राहा सजा सकता हूं
तू जहां-जहां पग रखें वहां की मिट्टी उठाकर मैं हवा में उड़कर की खुशबू फैल सकता हूं
तेरे चेहरे की मुस्कुराहट के लिए मैं खुद को जोकर बन सकता हूं
तू रुठा मत कर मुझे मैं खुद को तबाह कर सकता हूं
तू मेरा वह ख्वाब है जिसे मैं हकीकत बन सकता हूं
जब तक लिखी है जिंदगी मेरी तब तक तेरा साथ रह सकता हूं
मुझे नहीं आते यह वादे कसमे करना मैं बस इतना कर सकता हूं
मैं तेरी आंखों में एक आंसू नहीं आने दे सकता हूं
जब तक हूं तेरे साथ तेरे हर गम को मैं अपना बना सकता हूं।।