“उसका ही इंतज़ार…”
वो लौट आए तो कह देना, अब भी वही मंज़र है,
जहाँ उसके बिना, ना सुकून ना इख़्तियार मिले।
नज़रों में वही सूरत, लबों पे सिर्फ ज़िक्र उसका,
दुआओं में हर पल बस वही एक किरदार मिले।
ख़ामोश लम्हों में भी है उसका एहसास बाकी,
हर साँस में बस, एक उसका ही इंतज़ार मिले।
“कीर्ति" मोहब्बत का भी क्या अजीब फ़साना है,
जिसे भूलना चाहो, वही ख़्वाबों में बार-बार मिले।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️