सिर्फ तुम
मौन सी ख्वाइशों में
गूंजती तस्वीरों सी तुम ,
कुछ अनकही बातों सी तुम ,
कुछ अनछुई परछाइओं सी तुम ,
सिर्फ तुम ...... ।
तपते रेतो में जब्त होती
बारिश की बूंदों सी तुम ,
बिस्तरों में फैली सिलवटों सी
उंघती अँगड़ाईयों सी तुम ,
सिर्फ तुम ......... ।
बेपरवाह सी धड़कन में
मासूम कसक सी तुम ,
तपते जस्बादों में उठती
मीठी लहर सी तुम ,
मेरे निर्वात लम्हो की
बोलती हकीकत सी तुम ,
सिर्फ तुम ......... ।
मेरे शैल से मन में
उगती दूब की कोपल सी तुम ,
मेरी भीगी पलकों में
ठहरती ओस की बूंदों सी तुम ,
मेरी आवारगी को झुठलाती
मेरे अंतस की तिलस्म सी तुम ,
मेरी अपनी ... सिर्फ तुम ।
सुनीता