"इश्क़ की तपिश"
तुमने देखा कुछ ऐसे कि हाल-ए-दिल बे-हाल हुआ,
इश्क़ की दरिया में तेरी कतरा-कतरा सी बह गई मैं।
तेरी नज़रों के नूर में जब अपना अक्स देखा मैंने,
जो ना कहनी थी वो बातें, इशारों-इशारों में कह गई मैं।
जबसे डूबी तेरी आँखों में, तबसे लोग मुझसे जलने लगे,
दुनिया के सारे सितम, ख़ामोशी से हँसते-हँसते सह गई मैं।
तेरी बाहों के घेरे में तिनका-तिनका सी बिखर गई मैं,
दिल का आलम मत पूछो, बस तुझमें सिमटकर रह गई मैं।
तेरे इश्क़ की तपिश मिली तो पिघल गए जज़्बात मेरे,
पत्थर सी थी हाँ पहले, फिर रेत-सी बनकर ढह गई मैं।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️