Hindi Quote in Film-Review by Ranjeev Kumar Jha

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शराब वहीं,पर बोतल नयी।
हिंदी सिनेमा का रोमांस!
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रोमांस फिल्मों का इतिहास ऐसा है जैसे सरकारी योजनाएँ—हर पाँच-दस साल में नया नाम, नया पोस्टर, नया विज्ञापन… मगर काम वही ढाक के तीन पात। चलिए, हर दशक का रोमांस ठेका खोलकर देखें-

1960 का दशक – पेड़ों और बगीचों का रोमांस!

राजेश खन्ना जब "मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू" गाते-गाते जीप में घूम रहे थे, तब दर्शक सोच रहा था—“भाई, ये जीप है या रेडियो स्टेशन?”
उस दौर का रोमांस मतलब पहाड़ों, झीलों और पेड़ों के पीछे से झाँकती नायिका। प्यार तो कम, फूल-पत्ते ज्यादा दिखते थे।

1970 का दशक – छतरी और चांदनी का ठेका!

“रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना” गाते हुए राजेश खन्ना ने जैसे ही बारिश में छतरी उठाई, देश के पिताओं ने बेटियों से कहा—“छतरी लेकर बाहर मत निकलना।”
उस जमाने का रोमांस असल में “छतरी और चांदनी” का सिंडिकेट था। कहानी वही—मम्मी-पापा नाराज़, प्यार बेमिसाल।

1980 का दशक – फोर्स्ड नॉस्टैल्जिया!

आ गया कयामत से कयामत तक—आमिर और जूही खेतों में भागे, गाया “पापा कहते हैं…”।
सच बताइए, पापा कहते थे “इंजीनियर बन” और बेटा बन गया खेतों का गायक। जनता बोली—“ये प्यार है या बेरोज़गारी का बहाना?”

1990 का दशक – ट्रेन, ट्रंपेट और ताली बजाओ!

यशराज ने DDLJ से सिखाया कि असली रोमांस मतलब—यूरोप घूमो, शॉपिंग करो, और आखिर में ट्रेन पकड़ो।
"बड़े-बड़े देशों में छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं"—भाई, बड़ा-बड़ा बकवास भी वहीं होता है।
फिर आया कुछ-कुछ होता है—“प्यार दोस्ती है”।
अगर सचमुच ऐसा है तो फिर प्यार क्या है??

2000 का दशक – चांद तारे और मोबाइल रोमांस!

“तुम पास आए, यूँ मुस्कुराए” गाते-गाते SRK और काजोल ने हर कॉलेज कैंटीन को शादी मंडप बना दिया।
फिर आया कल हो ना हो—जहाँ हीरो मरते- मरते भी गाता रहा।
भाई, आम जनता का सवाल- “इतना गाने का टाइम कहां से लाते हो!"

2010 का दशक – आंसू और शराब का कॉम्बो

आशिकी 2 ने गाया “तुम ही हो…” और पूरे देश ने इसे इतना बजाया कि गैस सिलेंडर वाले तक ने एड बना लिया—
“भोजन भी तुम ही हो, धुआं भी तुम ही हो।”
इसके बाद हर फिल्म का रोमांस = आधा किलो आंसू + दो लीटर शराब।

2020 का दशक – व्हाट्सएप स्टेटस वाला रोमांस!

आज की फिल्में तो सीधे मोबाइल से लिखी लगती हैं।
“लव आज कल”, “ड्रीमगर्ल 2”, “जरा हटके जरा बचके”—ये फिल्में हैं या इंस्टाग्राम रील्स के नाम?
कहानी वही पुरानी, बस गाने में ऑटो-ट्यून और नायिका के हाथ में आई फोन।

हिंदी सिनेमा का रोमांस ऐसा ही है जैसे रेलवे का पकोड़ा—हर दशक में पैकेजिंग नई, मगर स्वाद वही बर्दाश्त से बाहर।
आलोचक इसे “एवरग्रीन क्लासिक” कहकर बेचते रहेंगे, और जनता पॉपकॉर्न चबाते हुए गाली देकर घर लौटती रहेगी,
चाहे सैय्यारा हो या भैयजारा!
आर के भोपाल।

Hindi Film-Review by Ranjeev Kumar Jha : 111999649
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