मैं न अब खामोश होना चाहती हूं
जो है मेरे अंदर उसे खुद तक ही रखना चाहती हूं
थोड़ा मुस्कुराकर फिर मायूस होकर
खुद से बस खुद से बातें करना चाहती हूं.....
वैसे बोलती तो बहुत हूं मैं पर
अब आहिस्ता आहिस्ता शब्दों के लहज़े को भूलना चाहती हूं,
सबकी नजरों से ओझल अकेले रहना चाहती हूं
मैं न अब खामोश होना चाहती हूं.....!!!!
_Manshi K